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Bhubaneswar भुवनेश्वर। पश्चिम एशिया में बने हालात और ईंधन खपत को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ओडिशा सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों के लिए 8 सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईंधन संरक्षण को लेकर चर्चा की थी। इसके बाद उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या कम की थी और आम लोगों से भी ईंधन की बचत करने की अपील की थी।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सरकारी कामकाज में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सरकार द्वारा जारी 8 प्रमुख निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा, सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्यता, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कारपूलिंग, वाहन उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन, आधिकारिक दौरों में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की योजना, सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा और ईंधन खपत में 10 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य शामिल है।
निर्देश के मुताबिक, सरकारी बैठकें, समीक्षा बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वर्कशॉप अब अधिकतर वर्चुअल मोड में आयोजित किए जाएंगे। केवल जरूरी अधिकारियों को ही शारीरिक रूप से उपस्थित रहने की अनुमति होगी। 1 जून से सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल या डीजल वाहन खरीदने की अनुमति मिलेगी।
सरकारी वाहन सुविधा पाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे वाहनों के लिए ईंधन आवंटन भी आधा किया जाएगा। वित्त विभाग को 15 दिनों के भीतर यह तय करने के निर्देश दिए गए हैं कि किन श्रेणी के अधिकारियों को निजी उपयोग के लिए सरकारी वाहन मिलेंगे। सरकारी काम से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बस और ट्रेन का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
सरकारी कार्यों में अधिकारियों के निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी वित्त विभाग को दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया है। जहां सरकारी कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां इलेक्ट्रिक बस या मिनी बस सेवा शुरू की जाएगी ताकि कर्मचारियों की दैनिक आवाजाही आसान हो सके। सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक वाहनों में पेट्रोल और डीजल की खपत हर महीने कम से कम 10 प्रतिशत तक घटाई जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों को राज्य सचिवालय, सरकारी विभागों, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों, ब्लॉक कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में सख्ती से लागू किया जाएगा।
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